मंगलवार, 7 मार्च 2017

आओ छू लें आसमान
8 मार्च पूरे विश्व में महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन दुनिया के सबसे ताकतवर और विकसित देश अमेरिका में मार्च के पूरे 31 दिनों को वुमेंस हिस्ट्री मंथ के रूप में मनाया जाता है दरअसल स्त्री शक्ति के इतिहास को पहचान देने के लिए 1978 में केलिफोर्निया की सोनोमा काउंटी की एजुकेशन टास्क फोर्स में पहली बार वुमेंस हिस्ट्री वीक मनाने का फैसला किया जिसे 8 मार्च को होने वाले इंटरनेशनल वूमेन डे वाले सप्ताह में ही रखा गया था। 3 साल बाद u s कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित कर इसे वैधानिक रुप से स्वीकार कर लिया। 1987 में कांग्रेस ने इसे सिर्फ सप्ताह के बजाए वुमंस हिस्ट्री मंथ के तौर पर अपनी मान्यता दे दी।
सन 1905 से लेकर 2016 तक का महिला इतिहास तरक्की के परचम लहराते हुए हर क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है ।महिला कार चालक, सोले फाइटर , अंतरराष्ट्रीय विमान चालक ,जज ,इंडियन एयरलाइंस की पहली महिला चालक ,कम्युनिटी लीडरशिप के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता, प्रधानमंत्री ,गवर्नर, मुख्यमंत्री ,राष्ट्रपति ,asian तथा राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली ,अंतरिक्ष यात्री, भारतीय थल सेना में महिलाओं ने अपने परचम लहरा कर और अन्य अछूते क्षेत्रों में वर्चस्व कायम कर यह साबित कर दिया है कि वह पुरूषों से कहीं भी और किसी भी स्तर पर कम नहीं है। आज पूरे विश्व में 8 मार्च का दिन महिला दिवस के रूप में मना कर पुरुषों ने महिलाओं का लोहा मान लिया है। अल्बानिया, अर्मेनिया, अजरबेजान ,बोस्निया, बुलगारिया ,कैमरून ,चीन, क्यूबा ,इटली ,कजाकिस्तान, मैसडोनिया ,मंगोलिया, रूस, यूक्रेन ,और वियतनाम जैसे देशों में महिला दिवस पर सामूहिक अवकाश रहता है महिलाओं का सम्मान भी इस दिन खास तरीके से किया जाता है। सुबह उठकर पुरुष अपनी पत्नियों को फूल देते हैं और सुबह का नाश्ता भी तैयार करते हैं। सन 2005 में ब्रिटिश ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने यूनाइटेड किंगडम में इस दिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया ।इटली और रूस में इस दिन महिलाओं को पीले रंग का छुई मुई का फूल दिया जाता है। ब्राजील और क्रोएशिया में कामकाजी महिलाओं को ऑफिस में फूल दिया जाता है। भारत में महिला दिवस का अपना महत्व है ।इस दिन कई संस्थाएं महिलाओं से संबंधित कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करती हैं। महिलाओं को उनकी विभिन्न क्षेत्रों की सफलताओं पर पुरस्कार भी दिया जाता है। बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी इसी तरह आयोजन किए जाते हैं।
संतोष श्रीवास्तव

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें