5 अगस्त को मेरे बेटे की पुण्यतिथि थी। ..........लेकिन वो गया कहाँ,मेरे आसपास ही तो है। वो जैसा घर सजाकर रखता था मै वैसा ही सजाकर रखती हूँ,उसकी पसँद का खाना खाती हूँ, जिस रूप जिस पहनावे में मै उसे अच्छी लगती थी,मैं वैसी ही रहती हूँ............मेरा हेमंत मेरे रहते तक रहेगा।
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