रविवार, 7 अक्टूबर 2018



भारत सरकार द्वार मालवगढ की मालविका का विश्व स्तर पर चयन
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भारत सरकार ने हिंदी की उच्चस्तरीय पुस्तकों में से कुछ अंश चुनकर विश्व भर के प्रकाशन संस्थानों को शोध एवं तकनीकी प्रयोग( इलेक्ट्रॉनिक्स )हेतु भेजने का निर्णय लिया है । इसके लिए मेरे उपन्यास "मालवगढ़ की  मालविका" का चयन भी किया गया है।  हिंदी को ग्लोबल लोकप्रियता दिलाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का यह कदम भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उठाया है। मालवगढ़ की मालविका उपन्यास मेरी 5 वर्षों की मेहनत थी। जिसका प्रथम संस्करण हार्ड बाउंड कव्हर का मेधा बुक्स दिल्ली से छपा था और अब उसका पेपरबैक संस्करण भी प्रकाशित हो गया है।

शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

राही सहयोग फाउण्डेशन द्वारा विश्व के  वर्तमान सौ टॉप के लेखक लेखिकाओं में मेरा नाम भी शामिल किया गया।
https://youtu.be/OBFMsAMj6nA
DNN समाचार चैनल द्वारा लिया गया मेरा लाइव साक्षात्कार
एंकर गायनॉकलॉजिस्ट डॉ नुज़हत सिद्दीकी





गुरुवार, 31 मई 2018

https://youtu.be/nQ_OvJlhrTU

हेमंत एक फीचर
यू ट्यूब चैनल डिजिटल वॉइस इंडिया द्वारा प्रसारित 

बुधवार, 30 मई 2018










विश्व मैत्री मंच द्वारा हेमंत स्मरण
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 जनवादी कवि हेमंत की जयंती पर विश्व मैत्री मंच द्वारा हेमंत स्मरण एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की संयोजक संतोष श्रीवास्तव ने सभी का स्वागत  करते हुए हेमंत का परिचय दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उर्वशी के संपादक डॉ राजेश श्रीवास्तव ने 22 वर्षीय हेमंत को याद करते हुए कहा कि उनमें गहरी एंद्रिकता के साथ-साथ आर-पार दृष्टि की समझ थी। कार्यक्रम की अध्यक्ष लघुकथा टाइम्स की संपादक कांता राय ने हेमंत की कविताओं में अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की क्षमता का उल्लेख करते हुए उनकी कविता " सांसों का सफर " का पाठ किया।
 हेमंत की बहुचर्चित कविता "मेरे रहते" का पाठ करते हुए अक्षरा की सहयोगी संपादक जया केतकी ने हेमंत की कविताओं में मृत्युबोध का उल्लेख किया। कार्यक्रम में 30 कवियों ने कविताएं सुनाई । संचालन सीमा शिवहरे ने तथा आभार विनीता राहुरीकर ने किया।
प्रस्तुति
संतोष श्रीवास्तव

रविवार, 20 मई 2018

यू ट्यूब चैनल डिजिटल वॉइस इंडिया में सुने संतोष श्रीवास्तव की कविताएँ


शहादत
इतवार मिला
किसे आवाज़ दूं 
आँच
अजुध्या की लपटें
विदा होता चैत्र
मज़दूर
डिजिटल वॉइस वर्ल्ड

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

सोवियत रूस की राजधानी मॉस्को से बटोरे यादगार लम्हे
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मास्को दुनिया के उन बड़े शहरों में है, जहां की नाइट लाइफ, भव्य इमारतें, म्यूजियम और दुर्लभ कलाकृतियों का आकर्षण देखते ही बनता है। ऐतिहासिक और पुरातात्विक में रुचि रखने वालों के लिए भी यह उम्दा शहर है। महलों और भवनों की वास्तुशैली देखते ही बनती है। यही कारण है कि इस शहर को क्रिएटिविटी का खजाना भी कहा जाता है। द्वितीय विश्वयुद्ध की स्मृति में बना विक्ट्री पार्क शहीदों की याद दिलाता है। मस्कवा नदी के किनारे ऊँचाई पर स्पैरो हिल्स एक ऐसा ऑब्जरवेशन प्लेटफार्म है जहां से मास्को यूनिवर्सिटी, luzhniki स्टेडियम, लेनिन स्टेडियम, naryshkin baroque towers इत्यादि देखे जा सकते हैं द्वितीय विश्वयुद्ध में रेड स्क्वायर विश्व का चौथा सबसे बड़ा स्क्वायर है जहां लेनिन टोम, सेंट बासिल कैथेड्रल आदि के खूबसूरत स्थापत्य हैं।

क्रेमलिन की दीवार यादों में बस गई
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सामंतवादी युग में रूस के विभिन्न नगरों में जो दुर्ग बनाए गए थे वे क्रेमलिन कहलाते हैं।इन सारे दुर्ग के चारों ओर घिरी दीवार क्रेमलिन की दीवार के नाम से मशहूर है।जो
करीब एक वर्ग किमी. में फैली है। इस मजबूत दीवार और भव्य इमारतों को देखकर रोमांच होता है। इसकी बनावट को देखकर रूस की नौकरशाही की भव्यता की अनुभूति होती है। एलेग्जेंडर गार्डन ,व्हाइट हाउस (रशियन फेडरेशन) थिएटर स्क्वायर ऐतिहासिक समय में मानो खींच ले जाते हैं।
सेंट पीटर्सबर्ग

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सेंट पीटर्सबर्ग नेवा नदीके तट पर स्थित रूस का एक प्रसिद्ध नगर है। यह रूसी साम्राज्य की पूर्व राजधानी थी। सोवियत संघ के समय में इसका नाम बदलकर लेनिनग्राद कर दिया गया था जिसे सोवियत संघ के पतन के बाद पुन: बदलकर सेंट पीटर्सबर्ग कर दिया गया है।
अब यह सोवियत रूस की सांस्कृतिक राजधानी है ।यहां का हरमिटेज म्यूजियम संगमरमर पर सोने की अद्भुत कलाकृतियों से बेहद समृद्ध इतिहास को समेटे एक ऐसा महल है जिसमें 350 कमरे हैं ।रशियन म्यूजियम सेंट, इसाक कैथेड्रल, पीटरहॉफ महल और पार्क, हाइड्रोफाइल आदि दर्शनीय स्थलों से समृद्ध यह शहर बेहद खूबसूरत है।